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नींद (नाइट शिफ्ट) की कमी बीमारियों को बुलावा ? Night shift leads to many illnesses in Hindi ?

एक समय था, दिन के समय काम होता था रात सोने के लिए होती थी। जैसे-जैसे  दुनिया प्रगति  करती गई दिन के साथ-साथ रात की शिफ्ट में भी काम होने लगा।

हमारे लिए दिन के दौरान सोना और रात के दौरान जागते रहना संभव है। लेकिन अगर यह लंबे समय के लिए किया गया तो यह गंभीर बीमारियों को जन्म देती है।  क्योंकि यह सब प्राकृतिक लय (जिसे हम सर्केडियन रिदम कहते हैं) के खिलाफ जाता है। सर्केडियन रिदम एक 24 घंटे की इंटरनल घड़ी है जो आपके ब्रेन के बैकग्राउंड में चलती रहती है और सोने और जागने को कंट्रोल करती है। नींद की कमी जो साधारणतया नाइट शिफ्ट में होती है जो तरह तरह की बीमारियों को बुलावा देती है। जैसे:

1. प्राकृतिक नींद(नेचुरल स्लीप) में बदलाव
नींद आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। जब आप सोतें हैं, तो आपका शरीर टॉक्सिन से छुटकारा पाता है और तनाव को कम करता है। वर्किंग नाइट शिफ्ट इन सभी गतिविधियों को  रोकती हैं और कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती हैं।

2.  ब्रेस्ट कैंसर
कुछ शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि जो महिलाएं रात भर काम करती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा उन महिलाओं की तुलना में अधिक होता है जो केवल दिन के दौरान काम करती हैं।

3. हार्ट अटैक
एक अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि नाइट शिफ्ट में काम करने से इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ेगा। नींद की कमी से रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ सकता है जो हार्ट डिजीज में भूमिका निभाते हैं।

4.  डिप्रेशन
नाइट शिफ्ट में काम करने से आपके मेंटल हेल्थ पर भी नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि जब आप रात की शिफ्ट में काम करते हैं तो  डिप्रेशन और मेमोरी लॉस का खतरा बढ़ जाता है।

5. चोट के जोखिम
आपका शरीर सोना चाहता है लेकिन नाइट ड्यूटी में आप उसे जगने के लिए मजबूर करते हैं ऐसे में अगर आप किसी मशीन पर काम कर रहे हों तो दुर्घटना की संभावना काफी बढ़ जाती है

6. मोटापा और मधुमेह (ओबेसिटी और डायबिटीज)
आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म ज्यादातर हार्मोन द्वारा कंट्रोल होता है। उदाहरण के लिए हार्मोन लेप्टिन आपके वजन, ब्लड शुगर और इंसुलिन के लेवल को कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रात की शिफ्ट में काम करने से इस महत्वपूर्ण हार्मोन का प्रोडक्शन गड़बड़ा जाता है और मोटापा और डायबिटीज के रूप में हमारे सामने आता है।