बच्चों का स्वास्थ्य

चमकी बुखार: कारण, लक्षण और बचाव Chamki fever in Hindi

एन्सेफलाइटिस या एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) या चमकी बुखार मस्तिष्क की सूजन है। यह आमतौर पर बच्चों और युवा वयस्कों को प्रभावित करता है। वर्तमान में, बिहार राज्य में इस घातक न्यूरोलॉजिकल बीमारी का प्रकोप देखा गया है, जिसने मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में कम से कम 156 बच्चों की जान ले ली है।
रात को खाली पेट सोने से, लीची खाने से, गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन इस घातक बीमारी के प्रकोप के कुछ कारण थे। वायरल संक्रमण से प्रभावित अधिकांश लोग 1-10 वर्ष की आयु के बीच के हैं। भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में अप्रैल से जून के दौरान अक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम के मामले देखे गए हैं, विशेषकर उन बच्चों में, जिन्होंने तेज धूप में लीची का उपयोग किया।

कमजोर इम्यूनिटी वाले कुपोषित बच्चों को इस रोग से ग्रस्त होने की संभावना काफी ज्यादा होती है। एड्स से प्रभावित लोगों में एन्सेफलाइटिस का खतरा बढ़ जाता है।
सीडीसी के अनुसार, अक्यूट एन्सेफेलाइटिस  सिंड्रोम (AES)  जापानी एन्सेफेलाइटिस वायरस (जेईवी) या अन्य इंफेक्शन और नाॅन इंफेक्शन कारणों से होता है।

वायरस को मुख्य रूप से भारत में AES का कारण माना जाता है, पिछले कुछ दशकों में बैक्टीरिया, फंगस, परजीवी, स्पिरोकैट्स, रासायनिक और विषाक्त पदार्थों सहित अन्य स्रोत भी इसमें शामिल हैं। लेप्टोस्पायरोसिस और टॉक्सोप्लाज्मोसिस का गंभीर रूप भी AES का कारण बन सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि लीची या लीची के फल में मौजूद एक टाॅक्सिन, मिथाइलीन साइक्लोप्रोपाइल-ग्लाइसिन (MCPG)  मस्तिष्क की सूजन का कारण है।

इस वर्ष अधिकांश बच्चों में मृत्यु का कारण हाइपोग्लाइसेमिया (लो ब्लड शुगर ) को माना गया है।

एन्सेफलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) / चमकी बुखार- लक्षण

  • बुखार
  • उल्टी
  • मतली
  • चिड़चिड़ापन
  • सुनने में कठिनाई
  • फोटोफोबिया (रोशनी में देखने में परेशानी)
  • मांसपेशियों / जोड़ों में दर्द और कमजोरी
  • गर्दन और शरीर में जकड़न और ऐंठन
  • दांत पर दांत दबाए रहना
  • थकान या कमजोरी
  • मानसिक भ्रम
  • भटकाव
  • उन्माद, बेहोशी  
  • दौरे (सीजर)
  • लकवा (पैरालिसिस)
  • कोमा

कैसे करें चमकी बुखार या इंसेफेलाइटिस से बचाव

  • मच्छरों को भगाने के लिए रिपेलेंट क्रीम का उपयोग करें।
  • लंबी बाजू के कपड़े पहनें।
  • हाइजीनिक स्थिति बनाए रखने के लिए टॉयलेट के इस्तेमाल के बाद और भोजन लेने से पहले साबुन और पानी से हाथ धोएं।
  • कीटनाशक का उपयोग करना
  • रुके हुए पानी को खत्म करें जिससे मच्छरों को बढ़ने से रोका जा सके।
  • बच्चों को सड़े गले भोजन और फल से बचाएं।
  • रात के खाने के बाद मीठा खिलाएं।
  • बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में तरल पदार्थ देते रहें ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो।
  • बच्चों को गर्मियों के मौसम में धूप में खेलने से मना करें।
  • अगर बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चे को हाइपोग्लाइसेमिया से बचाने के लिए कुछ मीठा जैसे जूस पिलाते रहें।