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आखिर मेरा मासिक धर्म (पीरियड्स) लेट क्यों है ? Why my periods are late ?

एक महिला के जीवन में दो मौके आते हैं जब पीरियड्स अनियमित होते हैं। पहला जब पीरियड्स शुरू होते हैं और दूसरा जब रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) शुरू होती है।
महिलाओं में पीरियड्स या मासिक धर्म सामान्य रूप से हर 21 से 35 दिनों में होता है और 2 से 7 दिनों तक रहता है। जो महिलाएं सेक्सुअली एक्टिव हैं उन महिलाओं के पीरियड्स आने में देरी चिंता का कारण बनी रहती है।

पीरियड्स देरी के  मुख्य कारण

तनाव (स्ट्रेस)

चिंता/तनाव/स्ट्रेस नियमित मासिक धर्म और ओव्यूलेशन से जुड़े गोनैडोट्रॉफ़िन नामक हार्मोन के कामकाज को बाधित करता है जो निश्चित रूप से पीरियड्स में देरी का कारण हो सकता है। ऐसे मामले में तनाव के कारण की तलाश करें और उसका इलाज करें। अपने दिल और दिमाग के नॉर्मल होने का इंतजार करें। तनाव के किसी भी स्तर को ध्यान (मेडिटेशन)  द्वारा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बर्थ कंट्रोल

गर्भनिरोधक कई मामलों में महिला के मासिक धर्म को प्रभावित करते हैं। चाहे वह अंतर्गर्भाशयी डिवाइस (काॅपर टी) हो, गर्भनिरोधक गोलियां हो या डेपो-प्रोवेरा शॉट ही क्यों न हो। फिर भी डॉक्टर सलाह देते हैं कि जो महिलाएं किसी भी प्रकार का गर्भनिरोधक उपयोग कर रही हैं और उनके पीरियड्स आने में 5 दिन से अधिक की देरी हो चुकी है तो प्रेगनेंसी टेस्ट जरूर करें, क्योंकि कोई भी गर्भनिरोधक 100% प्रभावी नहीं होता है।

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS)

मासिक धर्म चक्र के दौरान एक महिला के अंडाशय (ओवरी) में लगभग पांच फॉलिकल विकसित होने चाहिए जो एक परिपक्व अंडे को छोड़ने के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
PCOS के साथ महिलाओं में अतिरिक्त फॉलिकल विकसित होते हैं जो इस प्रक्रिया की बढ़ाते हैं। जिससे पीरियड्स में देरी होती है। PCOS पीरियड्स में देरी का कारण हो सकता है यहां तक की कुछ महिलाओं में पीरियड्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं। वजन बढ़ना और चेहरे, स्तनों पर घने बाल पीसीओएस के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं।

वजन घटना

बुलिमिया और एनोरेक्सिया जैसी बीमारीयों में  गंभीर रूप से वजन घटता है जो महिला के ओवुलेशन की प्रक्रिया को बाधित कर मासिक  धर्म में देरी करता है। वजन बढ़ने के साथ ही हार्मोन लेवल नॉर्मल हो जाता है और साथ ही साथ पीरियड्स भी नॉर्मल हो जाते हैं।

मोटापा

जिस प्रकार वजन घटने से महिला हार्मोन और पीरियड्स प्रभावित होते हैं, ठीक उसी प्रकार मोटापा भी महिलाओं में हार्मोन को प्रभावित करता है और पीरियड्स में देरी का कारण बनता है। खान-पान में परिवर्तन और एक्सरसाइज द्वारा वजन कंट्रोल करके पीरियड्स को नियमित किया जा सकता है।

अत्यधिक व्यायाम

जो महिलाएं घंटों तक एक्सरसाइज करती हैं खासतौर पर जब वो मैराथन दौड़ती हैं, उनमें मासिक धर्म अनियमित रहता है। अत्यधिक व्यायाम थायराइड और पिट्यूटरी हार्मोन को प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में खेल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

दवाएं

कीमोथेरेपी मेडिसिन, एंटीकॉन्वेलसेंट्स, एंटीडिप्रेसेंट आदि दवाएं आपके पीरियड्स को रोक सकती हैं। ऐसी दवाओं के लेबल ध्यान से पढ़ें और अपने डॉक्टर से चर्चा करें।

हाल ही में शुरू हुए पीरियड्स

युवा महिलाओं जिनमें कुछ समय पहले मासिक धर्म चक्र शुरू हुआ है, पीरियड्स में देरी हो सकती है क्योंकि शरीर को बदलते हुए हार्मोन लेवल के साथ एडजस्ट होने में थोड़ा समय लगता है। हालांकि इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है क्योंकि  समय के साथ पीरियड्स नियमित हो जाएंगे।

जीर्ण रोग (क्रॉनिक डिजीज)

सीलिएक रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों में हार्मोनल चेंज के कारण पीरियड्स में देरी हो सकती हैं।

शेड्यूल में बदलाव

सुनने में अजीब सा लग सकता है, लेकिन आपकी दिनचर्या में बदलाव जैसे यात्रा करना या दिन-रात की ड्यूटी या शिफ्ट बदलना और इसके विपरीत अपने बॉडी शेड्यूल के साथ  कुछ और बदलाव के कारण भी आपके पीरियड्स कुछ जल्दी या कुछ देरी से आ सकते हैं। चिंता की कोई बात नहीं है।

थायराइड

हाइपरथायरॉयड ग्रंथि या हाइपोथायराइड   पीरियड्स को प्रभावित करता है। थायरॉयड आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है, इसलिए हार्मोन का स्तर भी प्रभावित हो सकता है।

स्तनपान (ब्रेस्ट फीडिंग)

आप बच्चे के जन्म के बाद अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड करवा रही हैं तो आप के पीरियड्स लेट हो सकते हैं  इससे चिंतित न हों!  पीरियड्स की कमी पूरी तरह से सामान्य है।  यह लैक्टेशनल एमेनोरिया कहलाता है। कुछ महीनों के बाद आपकी मासिक अवधि वापस ट्रैक पर आ जाएगी।