संतुलित आहार

चीजें जो बच्चों को नहीं खानी चाहिए। Things should not be taken by Children in Hindi !

आलू के चिप्स और फ्रेंच फ्राइज़:

फ्रेंच फ्राइज़ और आलू के चिप्स बच्चों में बहुत ही लोकप्रिय भोजन है और यहां तक ​​कि वयस्क भी इसे खाना पसंद करते हैं। इनमें ट्रांस-फैट और नमक की मात्रा काफी ज्यादा होती है। जो मोटापे, उच्च रक्तचाप (बीपी), सांस संबंधी रोग और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को बढ़ाती है। जब इन चीजों को ज्यादा टेंपरेचर पर पकाया जाता है तो एक्रिलामाइड  नामक कैंसर पैदा करने वाला टॉक्सिन बनता  है।

पिज़्ज़ा:

आज के समय में क्या बच्चे क्या नौजवान हर किसी को पिज्जा पसंद है। यह खाने में जितना अच्छा लगता है उतना नुकसान भी पहुंचाता है। पिज्जा खाने से कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने के साथ दिल की बीमारियों के संभावनाएं बढ़ जाती है। पिज़्ज़ा के साथ कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से मोटापे और डायबिटीज की संभावना बढ़ जाती है।

कोल्ड ड्रिंक / सॉफ्ट ड्रिंक्स:

गर्मी के दिनों में बच्चे कोल्ड्रिंक बड़े चाव से पीते हैं लेकिन इसमें पाए जाने वाली शुगर की मात्रा बहुत बीमारियों की जड़ है जिसमें प्रमुख हैं मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक इत्यादि।

चॉकलेट मिल्क:

कई माता-पिता अपने बच्चों को  दूध पिलाने के चक्कर में चॉकलेट मिल्क या चॉकलेट मिल्क शेक खिलाते हैं ताकि दूध की पूर्ति हो सके। हालाँकि इससे भविष्य में बच्चे चॉकलेट की तरफ आकर्षित होते हैं ना कि दूध की तरफ।

डोनट्स और अन्य तली हुई मिठाइयाँ:

डबल चॉकलेट, ग्लॉन्ज डोनट्स, क्रीम डोनट्स या जलेबियाँ, इनमें उच्च मात्रा में शुगर और कृत्रिम खुशबू (आर्टिफिशियल फ्लेवर) होते हैं। इस तरह के प्रिजर्वेटिव स्वाद बढ़ाने, रंग जोड़ने, या कृत्रिम मिठास के रूप में उपयोग किए जाते हैं। एमएसजी ( मोनो-सोडियम ग्लूटामेट) पहले से ही बहुत से देशों में बेन हो चुका है।  मोनोसोडियम ग्लूटामैट, केमीकल के साथ मिलकर सिरदर्द, मोटापा और कैंसर की संभावना को बढ़ाते हैं। अगर आपके बच्चे में मीठे की लालसा है, तो दही का उपयोग करके फलों की चाट, फ्रूट बन या फ्रूट क्रीम बना कर दे सकते हैं।

सॉसेज और हॉट डॉग:

तेल या सॉस द्वारा चिकनी और फिसलन वाली बनावट  के कारण 10 साल से कम उम्र के बच्चों में चोकिंग (सांस घुटना) की संभावना काफी बढ़ जाती है। चोकिंग के जोखिम के अलावा, वे तले हुए / ग्रील्ड होते हैं, प्रिजर्वेटिव मौजूद होते हैं और इनकी न्यूट्रिटिव वैल्यू भी काफी कम होती है। कई शोध कहते हैं कि प्रोसेस्ड रेड मीट, जैसे हॉट डॉग या बोलोग्ना, मधुमेह (डायबिटीज), हृदय रोग (हार्ट डिजीज) और कोलोन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

बिना पका हुआ अंडा और मांस:

आधा उबला अंडा बच्चों के लिए एक आसान स्नैक है। बिना पके अंडे और मांस में साल्मोनेला बैक्टीरिया की मौजूदगी की संभावना काफी रहती है। यह बैक्टीरिया कम इम्युनिटी वाले बच्चों में गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसलिए बच्चों में यह सुनिश्चित करें कि उबला हुआ अंडा और पूरा पका हुआ मांस ही परोसा जाए।

मक्खन और पनीर:

बच्चे ही नहीं बड़ों को भी मक्खन और पनीर बहुत पसंद है। मक्खन और पनीर में सैचुरेटेड फैट और रासायनिक प्रदूषक (Chemical Pollutants) होते हैं – इसलिए बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है।

कैंडीज और लॉलीपॉप:

शुगर, कृत्रिम रंग और फ्लेवर, हार्ड कैंडीज, लॉलीपॉप, जेली, टॉफी आदि के  कारण कैविटीज़ और अन्य दंत समस्याएं हो सकती हैं। पोषक मूल्य (न्यूट्रिटिव वैल्यू)  जीरो होने के बावजूद भी इनका स्वाद बच्चों को बहुत पसंद है।

पॉपकॉर्न:

पॉपकॉर्न की बनावट और आकार बच्चों के लिए बहुत ही खतरनाक है वे न केवल दांतों से चिपके रहते हैं, बल्कि उनके छोटे, हल्के कण हँसते या निगलते समय आसानी से सांस की नली (विंडपाइप) में  जा सकते हैं। इससे घुटन और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। भगवान न करे! अगर पॉपकॉर्न की थोड़ी मात्रा फेफड़ों तक जाती है तो इससे फेफड़ों में संक्रमण या निमोनिया हो सकता है।

फलों का बीज:

बच्चों को ताजे फल परोसना संतुलित आहार का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालाँकि छोटे बीजों वाले फलों के साथ सावधानी बरती जानी चाहिए- जैसे: चेरी, सेब, आलूबुखारा, खुबानी आदि। बच्चों में यह बीज कभी भी चोकिंग का कारण हो सकते हैं। बीज में एमिग्डालिन होता है, जो खतरनाक साइनाइड टॉक्सिन पैदा करता है।
उपरोक्त खाद्य पदार्थों के अलावा, स्मोक्ड मांस, स्पोर्ट्स ड्रिंक और मीठा योगर्ट अन्य वस्तुएं हैं जिन्हें मॉडरेशन में सेवन किया जाना चाहिए। इनमें अधिक मात्रा में फैट और शुगर होती है।